Sunday, November 1, 2015

यादों की दुनिया

स्कूल में मेरी, होती थी अक्सर पिटायी !
मैं 2G था, और मैडम थी Wi-Fi !!
:
उस पर मेरा, सॉफ्टवेयर बडा पुराना था !
ट्यूब लाईट था मैं, जब CFL का जमाना था !!
:
गणित में तो, मैं बचपन से ही फ़्लॉप था !
भेजे का पासवर्ड, बड़े दिनों तक लॉक था !!
:
जब जब स्कूल जाने में, मैं लेट हुआ !
प्रिंसपल की डाँट से, सॉफ़्टवेयर अपडेट हुआ !!
:
हाईस्कूल में, ईश्क का वायरस घुस बैठा !
भेजे में सुरक्षित, सारा डाटा ,समाप्त कर बैठा !!
:
नजरों से नजरें टकरायी, पॉटेक्निक क्लास में !
मैसेज आया, मेरे दिल के इनबॉक्स में !!
:
जब जब मैंने, आगे बढकर पोक किया !
धीरे से उसने, नजरें झुकाकर रोक लिया
कॉलेज में देखा किसी गैर के साथ, तो मन बैठा !
ईश्क का वायरस, एंटीवायरस बन बैठा !!
:
वो रियल थी, लेकिन फ़ेक आईडी सी लगने लगी !
बातों से अपनी, मेरे यारों को भी ठगने लगी !!
:
आयी वो वापस, दिल पे मेरे नॉक किया !
लेकिन फ़िर मैंने, खुद ही उसको ब्लॉक किया !!
:
मेरे जीवन में, अब प्यार के लिए स्पेस नहीं !
मैं 'योगी' हूँ पगली, मजनू का अवशेष नहीं !!
:
कॉलेज से निकला, दुनियादारी सीखने लगा !
बना मैं शायर, देशप्रेम पर लिखने लगा !!
:
डरता है दिल, जिंदगी मेरी ना वेस्ट हो !
जो कुछ लिखूँ, सदियों तक कॉपी पेस्ट हो

Wednesday, October 7, 2015

जाति और भारत

आप चलते हो,
जाति के आधार पर ...
आप बात करते हैं,
जाति के आधार पर ...
आपके शरीर से गंध निकलती है
जाति के आधार पर ...
आप मरे हुए जानवर उठाते हो
जाति के आधार पर ...
आप शौचालय साफ करते हो
जाति के आधार पर ...
आप बेगारी करते हो
जाति के आधार पर ...
आपको नौकरी मिली
जाति के आधार पर ...
आपका दुरुपयोग होता है
जाति के आधार पर ...
आप शादी करते हो
जाति के आधार पर ...
आप जोड़ों को मारते हो
जाति के आधार पर ...
आप सम्मान पाते हो
जाति के आधार पर ....
आप अनादर करते हो
जाति के आधार पर ...
आप पोशाक पहनते हो
जाति के आधार पर ...
आप नंगे किये जाते हो
जाति के आधार पर ...
आप जिन्दा जलाये जाते हो
जाति के आधार पर ...
आप छेड़छाड़ करते हो
जाति के आधार पर ...
आप यौन-शोषण करते हो
जाति के आधार पर ...
आप बलात्कार पीड़ित हो
जाति के आधार पर ...
आप अपने घर जाते हो
जाति के आधार पर ...
आप संपत्ति बेचते हो
जाति के आधार पर ...
आप पार्टी को चलाते हो
जाति के आधार पर ...
आप देश को चलाते हो
जाति के आधार पर ...
आप लोकतंत्र को चलाते हो
जाति के आधार पर ...
आप चुनाव लड़ते हो
जाति के आधार पर ...
आप वोट करते हो
जाति के आधार पर ...
तुम ईर्ष्या करते हो
जाति के आधार पर ...
आपको शर्मिंदा होते हो
जाति के आधार पर ...
आप भोजन करते हो
जाति के आधार पर ...
आप भेदभाव करते हो
जाति के आधार पर ...
आप अलग रहते हो
जाति के आधार पर ...
आप उपेक्षा करते हो
जाति के आधार पर ...
लेकिन
जब बात आरक्षण की आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब शैक्षिक अवसर आता है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब रोजगार अवसर आता है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब आर्थिक लाभ की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब राजनीतिक भागीदारी की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब स्वतंत्रता की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब समानता की बात होती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब न्याय की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
ये दोहरे मापदण्ड
आपके स्वार्थी होने के परिचायक हैं...

Tuesday, August 25, 2015

बिगुल बजा दो

लोकतंत्र का युग स्वर्णिम
हमारे गांव कि कैद
नसीब ऐसी
बंजर-कांटेदार जमीन जैसी
जहां ना पहुंची आज़ादी
ना ही संविधान की परछाई ………
कैसी आज़ादी……?
कैसा लोकतंत्र ……?
वहां वही बात पुरानी
जातिवाद का उठत धुँआ
अपवित्र शोषित बस्ती का,
हैंडपाइप और कुंआ ………
चौखट-चौखट जमीदारी,
पैमाइश
शोषित का तन-मन जैसे
कंगलो नुमाइश ………
अरे लोकतंत्र के पहरेदारो
जागो
स्वार्थ को अब त्याग दो
लोकतंत्र का बिगुल,
बजा दो ………

Friday, February 20, 2015

जिंदगी तेरे रूप अनेक

मंदिर की पावन आरती
मस्जिद की अज़ान जिंदगी
मजदूर की सोयी हुई थकन
अमीर की अनिद्रा से परेशान जिंदगी
भूखे पेट की तमन्ना
रोटी के टुकड़े की मुस्कान जिंदगी
विधवा की जवानी
जलता हुआ मसान जिंदगी
बूढ़े की खांसी
पूरी होती दास्तान जिंदगी
संतुष्टि की चरम सीमा
जिंदगी तेरे रूप अनेकबच्चे की मुस्कान जिंदगी
वेश्या की जवानी
मजबूरी का बयान जिंदगी
नारी का अनमोल आभूषण
सिन्दूर की शान जिंदगी
जिंदगी तू गुल भी तू ही खारजिंदगी तेरे रंग हज़ार
जिंदगी तू बिके तू ही खरीदार
तू लम्हा भी सदी भी है
कहकहों का समंदर कहीं
आँसुओं की नदी भी है
तू ही नेकी तू ही बदी भी है
तू ही शैतान की जननी
तू ही अवतार-पैगम्बर
जिंदगी तेरे रंग हज़ार
जिंदगी तेरे रूप बेशुमार
बावफा इतनी के साँसों में बसती है
बेवफा ऐसी के पल में मौत बनती है

Sunday, February 15, 2015

ज़िन्दगी ख्वाब क्यूँ न हुयी…

रात की खुमारी,
तेरे बदन की खुशबू,
नथुनों में समाती मादक गंध
तेरे होठों से चूती शराब…
तेरे सांचे में ढले बदन की छुअन
रेशम में आग लगी हो जैसे
तराशे हुए जिस्म पे तेरे
फिरते मेरे हाथ
वो लरजना
वो बहकना
वो दहकना
वो पिघलना
हाय वो मिलना
अगर वो ख्वाब था तो इतना कम क्यूँ थाअगर वो ख्वाब था तो ज़िन्दगी ख्वाब क्यूँ न हुयी…
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