Wednesday, October 7, 2015

जाति और भारत

आप चलते हो,
जाति के आधार पर ...
आप बात करते हैं,
जाति के आधार पर ...
आपके शरीर से गंध निकलती है
जाति के आधार पर ...
आप मरे हुए जानवर उठाते हो
जाति के आधार पर ...
आप शौचालय साफ करते हो
जाति के आधार पर ...
आप बेगारी करते हो
जाति के आधार पर ...
आपको नौकरी मिली
जाति के आधार पर ...
आपका दुरुपयोग होता है
जाति के आधार पर ...
आप शादी करते हो
जाति के आधार पर ...
आप जोड़ों को मारते हो
जाति के आधार पर ...
आप सम्मान पाते हो
जाति के आधार पर ....
आप अनादर करते हो
जाति के आधार पर ...
आप पोशाक पहनते हो
जाति के आधार पर ...
आप नंगे किये जाते हो
जाति के आधार पर ...
आप जिन्दा जलाये जाते हो
जाति के आधार पर ...
आप छेड़छाड़ करते हो
जाति के आधार पर ...
आप यौन-शोषण करते हो
जाति के आधार पर ...
आप बलात्कार पीड़ित हो
जाति के आधार पर ...
आप अपने घर जाते हो
जाति के आधार पर ...
आप संपत्ति बेचते हो
जाति के आधार पर ...
आप पार्टी को चलाते हो
जाति के आधार पर ...
आप देश को चलाते हो
जाति के आधार पर ...
आप लोकतंत्र को चलाते हो
जाति के आधार पर ...
आप चुनाव लड़ते हो
जाति के आधार पर ...
आप वोट करते हो
जाति के आधार पर ...
तुम ईर्ष्या करते हो
जाति के आधार पर ...
आपको शर्मिंदा होते हो
जाति के आधार पर ...
आप भोजन करते हो
जाति के आधार पर ...
आप भेदभाव करते हो
जाति के आधार पर ...
आप अलग रहते हो
जाति के आधार पर ...
आप उपेक्षा करते हो
जाति के आधार पर ...
लेकिन
जब बात आरक्षण की आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब शैक्षिक अवसर आता है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब रोजगार अवसर आता है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब आर्थिक लाभ की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब राजनीतिक भागीदारी की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब स्वतंत्रता की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब समानता की बात होती है
आप जाति नहीं चाहते ...
जब न्याय की बात आती है
आप जाति नहीं चाहते ...
ये दोहरे मापदण्ड
आपके स्वार्थी होने के परिचायक हैं...

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