Friday, February 20, 2015

जिंदगी तेरे रूप अनेक

मंदिर की पावन आरती
मस्जिद की अज़ान जिंदगी
मजदूर की सोयी हुई थकन
अमीर की अनिद्रा से परेशान जिंदगी
भूखे पेट की तमन्ना
रोटी के टुकड़े की मुस्कान जिंदगी
विधवा की जवानी
जलता हुआ मसान जिंदगी
बूढ़े की खांसी
पूरी होती दास्तान जिंदगी
संतुष्टि की चरम सीमा
जिंदगी तेरे रूप अनेकबच्चे की मुस्कान जिंदगी
वेश्या की जवानी
मजबूरी का बयान जिंदगी
नारी का अनमोल आभूषण
सिन्दूर की शान जिंदगी
जिंदगी तू गुल भी तू ही खारजिंदगी तेरे रंग हज़ार
जिंदगी तू बिके तू ही खरीदार
तू लम्हा भी सदी भी है
कहकहों का समंदर कहीं
आँसुओं की नदी भी है
तू ही नेकी तू ही बदी भी है
तू ही शैतान की जननी
तू ही अवतार-पैगम्बर
जिंदगी तेरे रंग हज़ार
जिंदगी तेरे रूप बेशुमार
बावफा इतनी के साँसों में बसती है
बेवफा ऐसी के पल में मौत बनती है

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