रात की खुमारी,
तेरे बदन की खुशबू,
नथुनों में समाती मादक गंध
तेरे होठों से चूती शराब…
तेरे सांचे में ढले बदन की छुअन
रेशम में आग लगी हो जैसे
तराशे हुए जिस्म पे तेरे
तेरे बदन की खुशबू,
नथुनों में समाती मादक गंध
तेरे होठों से चूती शराब…
तेरे सांचे में ढले बदन की छुअन
रेशम में आग लगी हो जैसे
तराशे हुए जिस्म पे तेरे
फिरते मेरे हाथ
वो लरजना
वो बहकना
वो दहकना
वो पिघलना
हाय वो मिलना
वो लरजना
वो बहकना
वो दहकना
वो पिघलना
हाय वो मिलना
अगर वो ख्वाब था तो इतना कम क्यूँ थाअगर वो ख्वाब था तो ज़िन्दगी ख्वाब क्यूँ न हुयी…
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